प्रधान मंत्री रोजगार योजना

दोस्तों, इस योजना के जरिए जो भी लोग कारोबार करना चाहते हैं उन्हे बैंको के माध्यम से कम ब्याज दरों पर लोन दिया जाएगा। इस योजना के तहत आप किसी भी तरह के कारोबार करना चाहते हैं। लेकिन आपके पास धन की कमी है, तो आप प्रधानमंत्री रोजगार योजना के तहत लोन ले सकते हैं और खुद का कारोबार शुरू कर सकते हैं,और अपना सपना साकार कर सकते हैं

प्रधान मंत्री रोजगार योजना की विशेषता क्या है

दोस्तों इस योजना की मुख्य विशेषता यह है कि इससे शहर या गाँव के शिक्षित बेरोजगार युवक/युवती अपना उद्योग- धंधा शुरू करने के लिए उत्प्रेरित होते हैं। इस योजना के तहत ब्याज की दर काफी कम है एवं ऋण को आसान किस्तों में बांटकर उसे 7 वर्षो तक चुकता करने की छूट है,जिससे उधमियों को लोन चुकाने में आसानी होती है।

इसका एक और विशेषता है कि इसके तहत किसी प्रकार की अन्य वस्तु का बंधक नहीं लिया जाता है सिर्फ ऋण से निर्मित वस्तु ही बंधक सम्पति मानी जाती है।

प्रधान मंत्री रोजगार योजना का उद्देश्य क्या है

आप लोग तो जानते ही होंगे कि धन की कमी के चलते हमारे देश में न जाने कितने ही लोग खुद का कारोबार करने  की सोचते तो हैं, पर कर नहीं पाते। इसके अलावा अगर कुछ लोग कोशिश करते भी हैं तो निजी बैंकों द्वारा लिए गए बिजनेस लोन का ब्याज उनके लिए मुसीबत का कारण बन जाता है। ऐसे में प्रधान मंत्री रोजगार योजना के तहत लोगो को रोजगार का बेहतर अवसर दिया जा रहा है, इसमें बेरोजगार लोगों  को सस्ते ब्याज दर पर कारोबार करने के लिए लोन दिया जाएगा। इससे देश में बेरोजगारी तो घटेगी ही, साथ ही वे लोग इस लायक हो जाएंगे कि दूसरों को भी रोजगार प्रदान कर सके ।

प्रधान मंत्री रोजगार योजना के अंतर्गत कितना लोन लिया जा सकता है

दोस्तों आपको बता दूं कि प्रधान मंत्री रोजगार योजना के अंतर्गत अधिकतम दो लाख रूपए तक ऋण दिया जाता है।
यदि कम से कम पांच लोग एक ग्रुप बनाकर आवेदन करें तो दस लाख तक ऋण दिए जा सकते हैं।

प्रधान मंत्री रोजगार योजना के अंतर्गत  सब्सिडी के नियम क्या हैं



इस योजना के तहत सब्सिडी की दर 15 फीसदी तय की गई हैं जो कि 12 हजार पाँच सौ तक ही सीमित रहेगी। वहीं  सेल्फ हेल्प ग्रुप के प्रत्येक सदस्य को 15 हजार तक सब्सिडी मिल सकती हैं और इस प्रकार प्रति ग्रुप को 0.25 लाख तक की सब्सिडी मिल सकती हैं,और  उत्तर-पूर्व, हिमाचल प्रदेश, उत्तरांचल और जम्मू कश्मीर  के लिए यह सब्सिडी अधिकतम 15  हजार रूपए  तक रखी गई है।

प्रधान मंत्री रोजगार योजना के लिए पात्रता क्या होगी

👉योजना का आवेदन करने वाले व्यक्ति की पारिवारिक मासिक आय 40 हजार से अधिक नहीं होना चाहिए


👉योजना का लाभ उठाने के लिए आपकी उम्र कम से कम 18 वर्ष और अधिकतम 35 वर्ष तक ही होनी चाहिए। वंही महिलाओं, पूर्व सैनिक, विक्लांग, एससी/एसटी कैटगरी के लोगों के लिए इसमें 10 साल की उम्र की छूट दी गई है, यानी यह लोग 35 की उम्र के बाद भी अगले 10 साल तक आवेदन कर सकते हैं।

👉अगर आपके पास प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तकनीकी ज्ञान का प्रमाण पत्र है, तो भी आप इस योजना में आवेदन कर सकते हैं।


👉इस योजना में आवेदन करने वाला व्यक्ति कम से कम आठवी पांस हो, साथ ही उसके पास आठवी पास का प्रमात्र पत्र होना अनिवार्य़ है।


👉आवदेन करने वाले व्यक्ति ने पहले से किसी भी सरकारी बैंक से लोन न ले रखा हो।

👉अगर आप आवेदन करना चाहते हैं, तो जिस भी स्थान से आप आवेदन करें, वंहा आप कम से कम 3 सालों से जरूर रह रहे हों।

प्रधान मंत्री रोजगार योजना के अंतर्गत कितनी ब्याज दर देने होंगे


इस योजना के अंतर्गत भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा समय- समय पर जारी किए गए निर्देश के अनुसार ब्याज लगाया जाता है।वर्तमान में 25000 रूपए तक के ब्याज दर 12.5 प्रतिशत तथा 25000 रू. से 1 लाख रू. तक के ऋण पर ब्याज दर 15.5 प्रतिशत है।

प्रधान मंत्री रोजगार योजना के अंतर्गत किस व्यवसाय को प्राथमिकता मिलेगी

इसमें सभी प्रकार के व्यवसाय को रखा गया हैं। इसमें खेती किसानी के लिए लोन नहीं लिया जा सकता हैं लेकिन खेती से जुड़े व्यवसाय के लिए इस योजना के तहत लोन लिया जा सकता हैं,और अपना सपना साकार किया जा सकता है।

प्रधान मंत्री रोजगार योजना के लिए कितना सरकारी अनुदान दिया गया है

केंद्र सरकार द्वारा भारतीय रिजर्व बैंक के माध्यम से प्रत्येक आवेदक के मामले में परियोजना लागत के 15 प्रतिशत के बराबर लेकिन अधिकतम 7500 रू. तक की अनुदान की राशि संबधित बैंक द्वारा ऋणी के नाम से सावधि जमा रसीद बनाकर स्वयं के पास रख लिया जाता है। इसके अवधि न्यूनतम 3 वर्ष की होती है।

प्रधान मंत्री रोजगार योजना को पूरी तरह से लागू  कराने के लिए किसकी होगी अहम भूमिका

प्रधानमंत्री रोजगार योजना को जमीनी स्तर पर सही तरीके से उतारा जा सके इसके लिए जिला उद्योग केंद्र और उद्योग निदेशालय को अहम जिम्मेदारी सौंपी गई हैं।

प्रधान मंत्री रोजगार योजना के तहत कितना मिल सकता है लोन



इस योजना के तहत अलग अलग क्षेत्र के हिसाब से अधिकतम लोन की रकम तय की गई है। प्रधानमंत्री रोजगार योजना में सेवा क्षेत्र और उद्योग क्षेत्र के लिए दो लाख रुपए की अधिकतम लोन रकम तय की गई है। वंही कारोबार क्षेत्र के लिए 1 लाख रूपए और कार्यकारी पूंजी के लिए 10 लाख रूपए तक की अधिकतम रकम अदा की जा सकती है।

प्रधान मंत्री रोजगार योजना में चयन प्रक्रिया कैसी होगी



इस योजना में आवेदको की चयन के लिए जिला स्तरीय द्वारा आवेदको का इंटरव्यू लिया जाएगा।
इंटरव्यू में पास किए गए आवेदको के फॉर्म को बैंकों के पास जांच और स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा।
योजना के अंतर्गत किस आवेदक को लोन दिया जाएगा इसे तय करने का अधिकार बैंक के पास ही होगा।
इन सभी स्तर पर पास होने के बाद स्वीकृति आवेदको को बैंक द्वारा पूंजी दी जाएगी। लोन की महज 15 प्रतिशत राशि या अधिकतम 7500 रूपए ही नकद दिए जाएंगे।
अपने बिजनेस का 5 प्रतिशत धन आवेदक को ही लगाना पड़ेगा।
लोन की रकम अगर 6 से 8 महीने के भीतर वापिस करने पर ब्याज दर नहीं लगाया जाएगा। वंही इस समय को पार करने के बाद बैंक ब्याज सहित लोन की रकम वसूलेगा। लोन की रकम को चुकाने के लिए 3 से 7 वर्ष तक का समय दिया जा सकता है।

प्रधानमंत्री रोजगार योजना के भीतर आवेदन फॉर्म कैसे भरे



इस योजना के लिए ऑनलाइन फॉर्म भरने का प्रावधान नहीं हैं । इसके लिए ऑफलाइन प्रक्रिया ही मौजूद हैं जिसके लिए डीआईसी के ऑफिस में जाकर संपर्क करना होगा और वहाँ से फॉर्म लेकर भरना होगा,और जमा करना होगा।

जनसंख्या नियंत्रण कानून 2020


दोस्तों आपको बता दूं कि पिछली बार 15 अगस्त के दिन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने लाल किले से ‘जनसंख्या विस्फोट’ की बात कर एक ऐसे मुद्दे को छुआ है, जिस पर अब तक तमाम सरकारें जी चुराती रही हैं। इससे पहले
राजीव गाँधी जी ने एक बार इसकी चर्चा की थी और यह लंबे समय के लिए इसे देश की सबसे बड़ी समस्या बताई थी। बीते पिछले साल मोदी जी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कहा, ‘हमारे यहां जो जनसंख्या विस्फोट हो रहा है, यह आने वाली पीढ़ी के लिए संकट पैदा करता है। लेकिन यह भी मानना होगा कि देश में एक जागरूक वर्ग भी है जो इस बात को अच्छी तरह से समझता है,और पालन भी करता है

आज़ादी के  बाद कितनी आबादी बढ़ी है

आपको पता होना चाहिए  कि आजादी के बाद  1951 में हुई पहली जनगणना में देश की जनसंख्या 36.1 करोड़ थी, जो पिछली जनगणना यानी 1941 से 4 करोड़ 20 लाख अधिक थी। देश की आबादी अगले 10 वर्षों में 21.5 प्रतिशत यानी 7.81 करोड़ बढ़ी। यह एक दशक की सबसे बड़ी वृद्धि थी। इसके बाद के दशक यानी 1961 से 1971 के बीच की आबादी में 24.8 प्रतिशत की वृद्धि यानी 10.9 करोड़ की वृद्धि दर्ज की गई। इसके बाद के दशक यानी 1971-81 के बीच जनसंख्या 25 प्रतिशत यानी 13.76 करोड़ बढ़ी। वर्ष 1991 में भारत की जनसंख्या 84.63 करोड़ हो गई। इसके बाद के दशक यानी 2001 में देश की आबादी 102.70 करोड़ थी। इसने पहली बार 100 करोड़ का आँकड़ा पार किया,और 2011 कि जनगणना के बाद इसने 120 करोड़ का आंकड़ा भी पार किया।

क्या भारत में जनसंख्या  विस्फोट हो चुका है?

परिभाषा के अनुसार जनसंख्या विस्फोट, जनसंख्या में वृद्धि की उस दर को कहते हैं जब मौजूदा संसाधन इस वृद्धि को सहारा देने में सक्षम नहीं होता है। कुछ अर्थशास्त्रियों का कहना है कि भारत की जनसंख्या वृद्धि को जनसंख्या विस्फोट कहा जा सकता है, क्योंकि इससे कई तरह की समस्याएँ पैदा होंगी। खाने पीने की चीजों में कमी, ग़रीबी, बेरोज़गारी, निम्न जीवन स्तर और इससे जुड़ी कई दूसरी बातें सामने आती हैं।

क्या आबादी के मामले में चीन को पीछे छोड़ देगा भारत



आपको बता दूं कि चीन के बाद दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाला देश भारत तो है ही, इसकी आबादी बढ़ने की दर भी बहुत ज्यादा है। लेकिन उससे भी बड़ी बात यह है कि दूसरे कारक अधिक ख़तरनाक हैं। भारत के पास पूरी दुनिया का 2.4 प्रतिशत भू-भाग है और विश्व आय का सिर्फ़ 2 प्रतिशत इसकी आमदनी है, लेकिन दुनिया की 17 प्रतिशत आबादी भारत में है। एशिया की चौथीई आबादी इस देश में रहती है। फिलहाल देश की जनसंख्या वृद्धि की सालाना दर 1.90 प्रतिशत है। यह पहले से कम है, हालांकि इस दौरान मृत्यु दर कम हुई है और स्वास्थ्य कोई बेहतर नहीं हुआ है।

क्या बढ़ती जनसंख्या हमारी कम ‘जीडीपी वृद्धि दर’ का कारण है

दोस्तों इसे इस तरह समझा जा सकता है कि जनसंख्या वृद्धि के कारण भारत में प्रति व्यक्ति आय उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ी है। वर्ष 1950-51 और वर्ष 1980-81 के बीच औसत वार्षिक राष्ट्रीय आय 3.6 प्रतिश की दर से बढ़ी, लेकिन प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि 1 प्रतिशत की दर से ही हुई है। इसकी वजह यह है कि इस दौरान जनसंख्या में 2.5 प्रतिशत की दर से वृद्धि हुई है।

  भारत में जनसंख्या के कारण हो रही है खाद्य पदार्थों की कमी

जनसंख्या में वृद्धि का नतीजा यह होता है कि प्रति व्यक्ति खाद्य उत्पादों यानी खाने पीने की चीजों की कमी हो जाती है। अधिक जनसंख्या वाली अर्थव्यवस्था में विकास और कृषि उत्पादों में वृद्धि होने के बावजूद खाद्य संकट बना रहता है क्योंकि जो दर से कृषि विकास होता है, उसके ऊँची दर से जनसंख्या बढ़ती है।

भारत में जनसंख्या के हिसाब से कितनी निवेश की जरूरत है

आपको पता होना चाहिए कि हमारे देश में पूँजी निवेश और उसके परिणाम अर्थात कैपिटल आइटम रेशियो 4: 1 है। इस पर जनसंख्या में वृद्धि की दर 1.8 प्रतिशत हर वर्ष है। यानी भारत में विकास की स्थिति को आगे बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय आय का 7.1 प्रतिशत निवेश करना होगा।

भारत में बढ़ती जनसंख्या के कारण हो रही है रोजगार में कमी

नेशनल सैंपल डेवलपर ऑर्गनाइजेशन यानी एनएसएसओ के इंट चार्ट के मुताबिक़  भारत में बेरोजगारी की दर 45 साल के उच्चतम स्तर पर है। आर्थिक मंदी तो इसकी वजह है ही,साथ ही साथ जनसंख्या वृद्धि भी इसकी बड़ी वजह है।

बड़ी जनसंख्या मतलब बड़ा बाजार

दोस्तो, जहाँ अधिक जनसंख्या होगी, वहाँ बहुत बड़ा बाज़ार भी होगा। इस बड़े बाज़ार की क्रय शक्ति थोड़ी बहुत बढ़ी तो वह बहुत अधिक मात्रा में उत्पाद खरीद सकता है। इससे खपत बढ़ेगी, पसंद बढ़ेगी और अर्थव्यवस्था के विकास में ये दो बड़े कारक हैं। भारत में नरसिम्हा राव के समय जो आर्थिक सुधार कार्यक्रम चला गया, उसका बड़ा लाभ यह मिला कि एक बहुत बड़ी मध्यमवर्गीय समीक्षा, जिसके पास पहले से ज्यादा खरीदारी की ताकत थी। हालाँकि यह क्रय शक्ति यूरोप जैसी अर्थव्यवस्था की तुलना में बहुत ही कम थी, पर इस बड़े बाज़ार ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को आकर्षित किया। इससे दुनिया की अर्थव्यवस्था में भारत का महत्व तो बढ़ा ही, विश्व राजनीति में भी इसकी धाक बढ़ी। यही कारण है कि चीन और अमेरिका जैसे देश भी पाकिस्तान से नफरत कर भारत पर ज्यादा ध्यान देने लगे हैं।

अधीक जनसंख्या से वेतन में आती है गिरावट

अधिक जनसंख्या के आर्थिक फ़ायदे भी होती हैं, उनका लाभ उठाने की नीति होनी चाहिए। अधिक जनसंख्या के कारण सस्ते में बहुत बड़ा श्रमिक वर्ग मिलता है। सस्ते श्रम से उत्पादन लागत कम होती है और उत्पाद सस्ता होता है। विश्व अर्थव्यवस्था पर चीन के छा जाने की एक वजह यह भी है।

सबसे ज्यादा युवा जनसंख्या भारत में है

दोस्तों आपको बता दूं कि भारत की जनसंख्या की बड़ी खूबी यह है कि इसका 60 प्रतिशत भाग 40 वर्ष या उससे कम आयु का है। यह दुनिया की सबसे युवा आबादी है। इनमें काम करने की क्षमता अधिक होती है, खपत अधिक होती है, खर्च अधिक होता है, पसंद अधिक होती है। दूसरी ओर इनपर स्वास्थ्य सेवा का खर्च कम होता है, पेंशन का बोझ कम होता है। यूरोपीय अर्थव्यवस्था फ़िलहाल इस समस्या से जूझ रही है। चीन उस दिशा में बढ़ रहा है, इसलिए चीन अभी तक इसके रास्ते तलाश रहा है। 

यूपी सरकार आबादी नियंत्रण के लिए क्या करेगी

👉सरकारी नौकरी पाने, चुनाव लडऩे, पार्टी में बड़ा पद पाने पर भी लगेगी आजीवन प्रतिबंध

👉 दो बच्चों के नियम का उल्लंघन करने पर राशन कार्ड, वोटर कार्ड, आधार कार्ड, बैंक खाता, बिजली कनेक्शन और मोबाइल कनेक्शन होगी बंद

👉दो से अधिक बच्चे वालों को सरकारी स्कूल, हॉस्पिटल और बाक़ी सरकारी सुविधाएं भी नहीं मिलेगी

11 राज्य जहां लागू है जनसंख्या नियंत्रण नीति


1 बिहार-टू चाइल्ड पॉलिसी नगर पालिका चुनाव लडऩे की इजाज़त नहीं देती

2 उत्तराखंड-टू चाइल्ड पॉलिसी सिर्फ नगर पालिका चुनावों तक सीमित



3 आंध्र प्रदेश-1994 में पंचायती राज एक्ट के अनुसार दो से अधिक बच्चे होने पर चुनाव लडऩे पर रोक


👉दो से अधिक बच्चे वाले केवल तभी चुनाव लड़ सकते हैं यदि उनके पहले दो बच्चों में से कोई एक दिव्यांग हो।

4 गुजरात में लोकल अथॉरिटीज एक्ट के अनुसार दो से अधिक बच्चे वाले पंचायत और नगर पालिका के चुनाव नहीं लड़ सकते

5 मध्य प्रदेश- 2001 में टू चाइल्ड पॉलिसी के तहत सरकारी नौकरियों और स्थानीय चुनाव लडऩे पर थी रोक, लेकिन 2005 में फैसला बदल दिया

👉सरकारी नौकरियों और ज्यूडिशियल सेवाओं में अब भी टू चाइल्ड पॉलिसी लागू

6 छत्तीसगढ़-टू चाइल्ड पॉलिसी के तहत सरकारी नौकरियों और स्थानीय चुनाव लडऩे पर थी रोक, लेकिन 2005 में फैसला बदल दिया

👉सरकारी नौकरियों और ज्यूडिशियल सेवाओं में अब भी टू चाइल्ड पॉलिसी लागू

7. तेलंगाना- पंचायती राज एक्ट के अनुसार दो से अधिक बच्चे होने पर चुनाव लडऩे रोक

8. राजस्थान- पंचायती एक्ट 1994 के अनुसार दो से अधिक बच्चे होने पर सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य

9 महाराष्ट्र – से अधिक बच्चे वालों को ग्राम पंचायत और नगर पालिका के चुनाव लडऩे पर रोक

👉महाराष्ट्र सिविल सर्विसेस रूल्स ऑफ 2005 के अनुसार ऐसे शख्स को राज्य सरकार में कोई पद भी नहीं मिल सकता

👉जिन महिलाओं को दो से ज्यादा बच्चे वे पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम के फायदों से बेदखल

10 असम-एक जनवरी 2021 के बाद दो से अधिक बच्चे वाले व्यक्तियों को कोई सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी।

11 ओडिशा-दो से अधिक बच्चे वालों को अरबन लोकल बॉडी इलेक्शन लडऩे की इजाजत नहीं

11 जुलाई को ‘विश्व जनसंख्या दिवस’ मनाया जाता है।

क्या आप जानते हैं कि बढ़ती जनसंख्या संबंधी समस्याओं और चुनौतियों से निपटने के लिए प्रत्येक वर्ष 11 जुलाई को ‘विश्व जनसंख्या दिवस’ मनाया जाता है। ‘विश्व जनसंख्या दिवस’ पहली बार 1989 में तब मनाया गया था, जब विश्व की आबादी 5 बिलियन पहुंच गई थी। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम की शासकीय परिषद ने जनसंख्या संबंधी मुद्दों की आवश्यकता एवं महत्व पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रत्येक वर्ष 11 जुलाई को ‘विश्व जनसंख्या दिवस’ के रूप में मनाने की अनुशंसा की थी। तभी से जनसंख्या रुझान और बढ़ती जनसंख्या के कारण पैदा हुई प्रजननीय स्वास्थ्य, गर्भ निरोधक और अन्य चुनौतियों के बारे में ‘विश्व जनसंख्या दिवस’ पर प्रत्येक वर्ष विचार-विमर्श किया जाता है।

आप लोगो को पता होगा कि जनसंख्या वृद्धि पर लगाम कसने का सबसे सरल उपाय परिवार नियोजन ही है। लोगों में नजागृति का अभाव होने के कारण वे 10-12 बच्चों की फौज खड़ी करने में वे कोई परहेज नहीं करते हैं इसलिए सबसे पहले उन्हें जनसंख्या वृद्धि के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने की बहुत आवश्यकता है। यह समझने की जरूरत है कि जनसंख्या को बढ़ाकर हम अपने आने वाले कल को ही खतरे में डाल रहे हैं।

जनसंख्या नियंत्रण के लिए हमारे संविधान में क्या कहा गया है

👉15 अगस्त 2019 को पीएम मोदी जी ने देश में बढ़ती जनसंख्या की समस्या पर भाषण दिया।


👉 1976 में 42वां संविधान संशोधन विधेयक पास हुआ। संविधान की सातवीं अनुसूची की तीसरी सूची में जनसंख्या नियंत्रण और परिवार नियोजन जोड़ा गया।

👉42वें संविधान संशोधन ने केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों को जनसंख्या नियंत्रण और परिवार नियोजन के लिए कानून बनाने का अधिकार दिया।

👉’हम दो, हमारे दो’ कानून बनाने को लेकर 09 मार्च 2018 को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर हुई लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया

दोस्तों अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो मुझे follow कीजिए क्योंकि मैं ऐसे ही लेख आप लोगों के लिए लाता रहूंगा

वन नेशन वन हेल्थ कार्ड योजना

दोस्तों जैसा कि आप लोग जानते होंगे कि स्वतंत्रता दिवस यानी 15 अगस्त का दिन नजदीक है। कोरोना महामारी और लॉकडाउन के कारण इस बार उत्साह कुछ फीका रहेगा, लेकिन इस बात की चर्चा अभी से होने लगी है कि लाल किले से “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी क्या स्पीच देंगे”, “पीएम मोदी इस बार क्या बड़ा ऐलान करने जा रहे हैं”, माना जा रहा है कि पीएम मोदी वन नेशन वन हेल्थ कार्ड या एक देश एक स्वास्थ्य कार्ड की घोषणा कर सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो यह स्वास्थ्य सेवा के लिहाज से बड़ा कदम होगा, क्योंकि इस कार्ड के माध्य्म से लोग देश के किसी भी हिस्से में इलाज करवा पाएंगे।

वन नेशन वन हेल्थ कार्ड योजना के तहत, क्लीनिक और डॉक्टर सभी एक केंद्रीय सर्वर से जुड़े होंगे। हालांकि, यह पूरी तरह से अस्पतालों और नागरिकों पर निर्भर करेगा कि वे ‘वन नेशन वन हेल्थ कार्ड’ योजना में शामिल होना चाहते हैं या नहीं। इस कार्ड के लिए आवेदन करने वाले प्रत्येक नागरिक को एक विशिष्ट आईडी जारी की जाएगी, जिसके माध्यम से वह सिस्टम में लॉग इन कर सकेगा।

वन नेशन वन हेल्थ कार्ड’ योजना के तहत, कार्ड में लोगों के मेडिकल इतिहास का रिकॉर्ड होगा। जिसमें एक व्यक्ति द्वारा कराए गए सभी उपचार और परीक्षण शामिल होंगे। खास बात यह है कि इस पूरे रिकॉर्ड को केवल डिजिटल फॉर्मेट में रखा जाएगा।

बिना सहमति के कोई और नहीं देख पायेगा आपका रिपोर्ट

इस योजना में गोपनीयता का पूरा ध्यान रखा जाएगा, किसी भी व्यक्ति की हेल्थ प्रोफाइल बिना उसकी अनुमति से कोई नहीं देख सकेगा ना डॉक्टर ना ही कोई हॉस्पिटल का स्टाफ।
इस योजना का दायरा बाद में व्यापक होगा, जिससे ना सिर्फ डॉक्टर, हॉस्पिटल, क्लीनिक, बल्कि मेडिकल स्टोर, मेडिकल इंश्योरेंस प्रोवाइड करने वाली कंपनियां सभी इसके जरिए सर्वर से कनेक्टेड रहेंगी।


हेल्थ कार्ड बनने पर अगर कोई डॉक्टर के पास इलाज के लिए जाता है, तो उसकी सहमति से डॉक्टर उसका रिकॉर्ड ऑनलाइन देख सकेंगे,

इसके लिए ऐसा सिस्टम तैयार किया जा रहा है कि किसी का व्यक्तिगत डाटा उसकी सहमति के बगैर कोई दूसरा नही देख सकता। इसके लिए मोबाइल पर वन टाइम पासवर्ड जैसी सुविधा दी जा सकती है।

मान लीजिये किसी ने अगर अपना कोई हेल्थ का टेस्ट करवा रखा है तो उसकी डिटेल भी एक जगह ऑनलाइन उपलब्ध होगी उसे डॉक्टर को दिखाया जा सकता है।

हर नागरिक का एक सिंगल यूनिक आइडी जारी किया जाएगा। आईडी मिलने के बाद उसी आईडी पर login होगा, चरणबद्ध तरीके से इसको लागू किया जाएगा।

वन नेशन वन हेल्थ कार्ड का उद्देश्य

वन नेशन वन हेल्थ कार्ड योजना के लागू होने से इलाज कराने के लिए आपको पर्चे और टेस्ट रिपोर्ट लेकर नहीं जाना पड़ेगा, बल्कि सभी का एक हेल्थ कार्ड होगा।

जिसमें होने वाले ट्रिटमेंट और टेस्ट की पूरी जानकारी सेव रहेगी। डॉक्टर कहीं से भी बैठकर आपकी यूनिक आईडी के जरिए सारा मेडिकल रिकॉर्ड देख सकेगा।

वन नेशन वन हेल्थ कार्ड का लाभ

वन नेशन वन हेल्थ कार्ड का सबसे बड़ा लाभ यह है कि कोई भी व्यक्ति जो देश में कही भीं डॉक्टर के पास या अस्पताल जाता है तो, उसे अपने साथ पिछली जांच रिपोर्ट या इलाज का ब्यौरा साथ नहीं ले जाने पड़ेंगे। डॉक्टर यूनिक आईडी के जरिए मरीज के रिकॉर्ड देख पाएंगे।

वन नेशन वन हेल्थ कार्ड को आधार कार्ड की तरह ही बनाया जाएगा

दोस्तों आपको बता दूं कि यह हेल्थ कार्ड आधार कार्ड की तर्ज पर बनाया जाएगा। हालांकि, यह अनिवार्य नहीं होगा और लाभार्थी किसी भी समय योजना से बाहर निकल सकेंगे। लोगों की व्यक्तिगत जानकारी को सुरक्षित रखने के लिए पूर्ण उपाय किए जाएंगे।

‘वन नेशन वन हेल्थ कार्ड’ योजना का दायरा धीरे-धीरे बढ़ाया जाएगा ताकि न केवल क्लीनिक और अस्पताल बल्कि मेडिकल स्टोर और मेडिकल इंश्योरेंस कंपनियां भी इस योजना के जरिए सर्वर से जुड़ सकें। लोगों की निजता का अत्यधिक महत्व होगा। एक डॉक्टर या अस्पताल को किसी व्यक्ति के रिकॉर्ड का उपयोग करने की अनुमति केवल तभी दी जाएगी जब वह उसी के लिए अनुमति देगा।

इस योजना के लिए 470 करोड़ रुपये की मिली मंजूरी

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस योजना की शुरुआत पहले देश के चुनिंदा राज्यों में की जाएगी और इसके बाद अलग-अलग चरणों में देशभर में लागू कर दिया जाएगा। इसके लिए वित्त मंत्रालय ने 470 करोड़ रुपये की मंजूरी भी दी है। इस योजना में हेल्थ आईडी धारकों के डाटा की गोपनीयता का पूरा ख्याल रखा जाएगा। उनकी मर्जी के बिना उनकी जानकारी किसी और को नही मिल पाएगी। इस यूनिक हैल्थ आईडी को लोग आधार कार्ड से भी जोड़ सकते हैं, इसके लिए भी विकल्प खुला रहेगा।

कैसे काम करेगी वन नेशन वन हेल्थ कार्ड योजना

दोस्तों आपको बता दूं कि इस योजना के तहत अस्पताल, क्लिनिक, डॉक्टर सभी एक सेंट्रल सर्वर से लिंक रहेंगे। अस्पताल और नागरिकों के लिए अभी ये उनकी मर्जी पर निर्भर करेगा कि वो इस मिशन से जुड़ना चाहते है या नहीं। हर नागरिक का एक सिंगल यूनिक आइडी जारी होगा। उसी आधार पर लॉगिन होगा। सरकार इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करेगी।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना

दोस्तों आपको बता दूं कि किसान सम्मान निधि योजना एक केंद्रीय क्षेत्रक योजना है, जिसकी शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 24 फरवरी, 2019 को लघु एवं सीमांत किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से की गई थी।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना या पीएम किसान, देश के किसानों के लिए सरकार की सबसे बड़ी लाभदायक योजनाओं में से एक है। मोदी सरकार ने किसानों की आर्थिक रूप से सहायता करने की शुरुआत की थी। इस योजना में किसानों को 3 किस्तों में सालाना 6000 रुपये की मदद की जाती है। कोरोना वायरस के इस दौर में किसानों के लिए यह योजना काफी मददगार साबित हुई। लॉकडाउन से अब तक किसानों के खाते में 19,350.84 करोड़ रुपये की मदद भेजी जा चुकी है। अब तक किसानों को 6 किस्त मिल चुकी है।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का उद्देश्य क्या है

इस योजना का प्राथमिक उद्देश्य देश कि लघु एवं सीमांत किसानों को प्रत्यक्ष आय संबंधी सहायता प्रदान करना है।
यह योजना लघु एवं सीमांत किसानों को उनकी निवेश एवं अन्य ज़रूरतों को पूरा करने के लिये आय का एक निश्चित माध्यम प्रदान करती है।
योजना के माध्यम से लघु एवं सीमांत किसानों को साहूकारों तथा अनौपचारिक ऋणदाता के चंगुल से बचाने का प्रयास किया जा रहा है।

पीएम-किसान योजना की मौजूदा स्थिति क्या है

मौजूदा वित्तीय वर्ष के केंद्रीय बजट में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लिये 75,000 करोड़ रुपए की राशि प्रदान की गई है, जिसमें से 50,850 करोड़ रुपए से अधिक की राशि जारी की जा चुकी है।
हाल ही के आंकड़ों के अनुसार, अब तक 8.45 करोड़ से अधिक किसान परिवारों को इस योजना का लाभ पहुँचाया जा चुका है, जबकि इस योजना के तहत कवर किये जाने वाले लाभार्थियों की कुल संख्या 14 करोड़ है। आपको बता दूं कि अभी हाल ही में
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने घोषणा की है कि पीएम-किसान योजना के सभी लाभार्थियों को किसान क्रेडिट कार्ड प्रदान किया जाएगा, ताकि वे आसानी से बैंक से ऋण प्राप्त कर सकें।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का budjet कितना है

दोस्तों आपको बता दूं कि इस योजना का वित्तपोषण केंद्र सरकार द्वारा किया जा रहा है। इस योजना पर अनुमानतः 75 हज़ार करोड़ रुपए का वार्षिक व्यय आएगा।
इस योजना के तहत पात्र किसान परिवारों को प्रतिवर्ष 6,000 रुपए की दर से प्रत्यक्ष आय सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
यह आय सहायता 2,000 रुपए की तीन समान किस्तों में लाभान्वित किसानों के बैंक खातों में प्रत्यक्ष रूप से हस्तांतरित की जाती है, ताकि संपूर्ण प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।
आरंभ में यह योजना केवल लघु एवं सीमांत किसानों (2 हेक्टेयर से कम जोत वाले) के लिये ही शुरू की गई थी, किंतु 31 मई, 2019 को कैबिनेट द्वारा लिये गए निर्णय के उपरांत यह योजना देश भर के सभी किसानों हेतु लागू कर दी गई।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की सबसे बड़ी चुनौती क्या है

दोस्तों आपको बता दूं कि बिहार में लाभार्थियों की संख्या 158 लाख है, जबकि केवल 59.7 लाख किसानों का डेटा ही अपलोड किया गया है। राज्य ने लाभार्थी आवेदन के लिये अलग पद्धति अपनाई है जिसके कारण पहचान और डेटा अपलोड करने में देरी हो रही है।वहीं दूसरी तरफ बंगाल अब तक इस योजना में शामिल नहीं हुआ है। आधिकारिक सूचना के अनुसार, पश्चिम बंगाल सरकार ने किसानों के डेटा को सत्यापित नहीं किया है। अनुमानित आँकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में लगभग 70 लाख लोग योजना के लिये पात्र हैं।
पश्चिम बंगाल के कुल पात्र किसानों में से लगभग 10 लाख किसानों ने व्यक्तिगत रूप से ऑनलाइन आवेदन किया है, किंतु किसानों के संपूर्ण डेटाबेस का राज्य सरकार द्वारा सत्यापित किया जाना अभी शेष है।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लिए अंतिम निष्कर्ष क्या निकलता है

देश में किसानों की मौजूदा स्थिति को देखते हुए इस तथ्य से इनकार नहीं किया जा सकता की यह योजना किसानों को एक आर्थिक आधार प्रदान करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकती है। हालाँकि कई विशेषज्ञों का मानना है कि योजना के तहत दी जा रही सहायता राशि अपेक्षाकृत काफी कम है, किंतु हमें यह समझना होगा कि इस योजना का उद्देश्य किसानों को उनकी निवेश संबंधी ज़रूरतों को पूरा करने के लिये एक आर्थिक आधार प्रदान करना है, ताकि वे फसल उत्पादन में नवीन तकनीक और गुणवत्तापूर्ण बीजों का प्रयोग कर उत्पादन में बढ़ोतरी कर सकें। आवश्यक है कि योजना के मार्ग में स्थित विभिन्न बाधाओं को समाप्त कर इसे अधिक-से-अधिक किसानों के लिये लाभदायी बनाया जा सके।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ उठाने के लिए इन दस्तावेजों का होना जरूरी है

दोस्तों आपको बता दूं कि रजिस्ट्रेशन करने से पहले इन दस्तावेजों का होना जरूरी है।

आपके पास जमीन के कागज होने चाहिए, इसके अलावा आधार कार्ड, अपडेटेड बैंक अकाउंट, ऐड्रेस प्रूफ, खेत संबंधी जानकारी और पासपोर्ट साइज फोटो जरूरी है, क्योंकि इन दस्तावेजों के बिना आप प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ नहीं उठा पाएंगे

प्रधान मंत्री मुद्रा लोन योजना

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना PMMY के तहत लोन लेने के लिए आपको सबसे पहले बैंक की किसी शाखा में आवेदन देना होगा। आप किस प्रकार का काम शुरू करना चाहते हैं, इसकी पूरी जानकारी आपको ब्रांच मैनेजर को देना होगा। यदि आपका काम स्‍वयं का है तो उसके संचालन के लिए भवन आदि की जरूरत होगी। आपको संबंधित भवन के मालिकाना हक के कागज, किरायानामा, किरायेनामे से जुड़े कागज़ात, कामकाज से जुड़ी जानकारी, आदि देना होगा। स्‍वयं की जानकारी के लिए आपको आधार कार्ड, पैन कार्ड आदि अहम दस्‍तावेज देना होंगे।

प्रधान मंत्री मुद्रा लोन योजना का अर्थ हैं Micro Units Development Refinance Agency, जिसे MUDRA कहा गया छोटे अर्थ में मुद्रा मतलब धन से हैं, यानी कुटीर उद्योगों को धन की सहायता करना यही इस योजना का मुख्य बिंदु हैं

खास बात यह है कि इस योजना से लोन लेने की प्रक्रिया में किसी गारंटर की जरूरत नहीं होती, ना ही आवेदक को अपनी संपत्ति या दस्तावेज गिरवी रखने की जरूरत होती है। भारत सरकार स्‍वयं ही गारंटर के रूप में होती है। लेकिन, लोन की श्रेणी के अनुसार संबंधित आवेदक की वित्‍तीय हालत की जांच ज़रूर की जाती है। खास तौर पर 2 लाख रुपए से अधिक लोन की राशि के लिए आवेदक को टर्न ओवर, बैलेंस शीट आदि के प्रमाण उपलब्‍ध कराने होते हैं।

प्रधान मंत्री मुद्रा लोन योजना से कोई भी ब्यक्ति आसानी से लोन ले सकेगा

👉मुद्रा लोन से 10 लाख तक का लोन आसानी से लिया जा सकेगा।
👉मुद्रा लोन स्कीम में किसी भी गारन्टी की जरूरत नई होगी।
👉मुद्रा लोन से छोटे दुकानदारो को भी लाभ मिलेगा जो अपने कारोबार को आगे बढ़ाना चाहते हैं।
👉बैंक ऋण देने वाली संस्थाओं को नई तकनीक उपलब्ध कराएगी जिससे ऋण लेने और देने में आसानी होगी।

मुद्रा लोन के प्रकार कितनी है

मुख्यत: इस योजना के तहत मुद्रा लोन के 3 प्रकार है।

👉शिशु लोन- शिशु ऋण के तहत 50 हज़ार तक के ऋण दिए जा सकते हैं|
👉किशोर लोन -किशोर ऋण के तहत 50 हज़ार के ऊपर और 5 लाख रुपए तक के ऋण भी दिए जा सकते हैं।
👉तरुण लोन -तरुण लोन के तहत 5 लाख रुपय से ऊपर और 10 लाख रुपए तक के ऋण दिए जा सकते हैं।

प्रधानमंत्री मुद्रा बैंक योजना की स्थापना कब की गई थी

दोस्तों यहां हम आपको बता दें कि मुद्रा बैंक योजना 8 अप्रैल 2015 को शुरु की गई, यह योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने शुरू किया था। तथा इस योजना का मुख्य उद्देश्य था पढ़े-लिखे नौजवानों को रोजगार प्रदान करना।

मुद्रा योजना के अंतर्गत लोन कैसे मिलेंगे

अगर कोई भी भारतीय नागरिक मुद्रा लोन योजना के तहत लाभ उठाना चाहता है तो उसे निम्न प्रक्रियाओं का पालन करना होगा:-

सबसे पहले ऋण प्राप्त करने को इच्छुक व्यक्ति को नजदीक के किसी बैंक में जाकर प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के लिए बैंक से संपर्क कर उनसे योजना का फॉर्म प्राप्त करना होगा।
फिर ऋण आवेदन फॉर्म को भरकर साथ में मांगे गए कागजातों और आपके द्वारा किए जाने वाले व्यवसाय या फिर आप जिस किसी नए व्यवसाय को शुरू करना चाहते हैं, उसका विस्तृत विवरण प्रस्तुत करना होगा।
इसके बाद बैंक द्वारा निर्धारित सभी औपचारिकताओं को पूरा करना होगा,
सभी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद आपका ऋण मंजूर होगा और आपको उपलब्ध कराया जाएगा।

प्रधानमंत्री मुद्रा बैंक योजना की योग्यता क्या है

मुद्रा बैंक योजना के तहत हर वह व्यक्ति जिसके नाम पर कोई उद्योग है। वह मुद्रा बैंक योजना के तहत ऋण ले सकता है।

प्रधान मंत्री मुद्रा योजना के आवेदन के लिए ज़रूरी कागजात क्या क्या होंगी

दोस्तों प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के अंतर्गत ऋण प्राप्त करने के इच्छुक व्यक्ति यही सोच रहे होंगे कि अब हमें कौन कौन से दस्तावेज देने होंगे ? आइए हम आपको बताएं प्रधानमंत्री मुद्रा लोन प्राप्त करने के लिए आपको आवश्यक दस्तावेज कौन कौन से देने होंगे।

👉सबसे पहले हम आपको बता दें प्रधानमंत्री मुद्रा लोन प्राप्त करने के लिए आपको पहचान के लिए आधार कार्ड देना होगा – Aadhaar Card
👉जो भी बिज़नेस शुरू करने की आप योजना बना रहे हैं आपको उसका प्रपोजल जमा करना होगा – Business Proposal
👉आवेदक को अपना स्थाई निवास प्रमाण पात्र देना होगा – Residence Proof
👉आवेदक को अपना हाल ही में लिया गया पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ देना होगा – Passport Size Photo
👉आवेदक को अपने बिज़नेस से सम्बंधित जो भी उपकरण या मशीनें चाहियें, उनका क्वोटेशन प्रस्तृत करना होगा – Quotation of Business & Other Machinery to be purchased
👉मशीन या उपकरण सप्लाई करने वाले नाम या मशीनों का रेट – Name of the Supplier or Price of the machinery
👉बिज़नेस का आइडेंटिटी या एड्रेस प्रूफ – Proof of Identity/Address of business
👉जाति प्रमाण पत्र – Caste Cerificate (For SC,ST,OBC) Applicants

PMMY के तहत किस लोन में चुकाना होगा कितनी ब्‍याज दर

👉शिशु लोन की सीमा 50 हजार रुपए तक होती है। इसे चुकाने की अवधि 5 साल है। इसे 10-12% ब्याज दर से चुकाना होता है।

👉किशोर लोन की सीमा 50 हजार से 5 लाख रुपए तक होती है। इसे चुकाने की अवधि लोन के हिसाब से तय होती है। इसे 14-16% ब्याज दर से चुकाना होता है।

👉तरुण लोन की सीमा 5 लाख से 10 लाख रुपए तक होती है। इसे चुकाने की अवधि लोन के हिसाब से तय होती है। इसे 16% की ब्याज दर से चुकाना होता है।

यदि पहले से व्‍यापार है तो भी PMMY के तहत लोन लेना संभव है

आपको प्रधानमंत्री मुद्रा योजना PMMY के तहत लोन तो मिलेगा लेकिन इसके लिए आपको जिस बात का सबसे अधिक ध्‍यान रखना है वह है अपने कार्य की प्रकृति के बारे में जानकारी देना। उसके आधार पर ही लोन स्‍वीकृत होगा। खास बात यह है कि यदि आपके पास पहले से ही कोई व्‍यापार है और आप उसे आगे बढ़ाना चाहते हैं तो इसके लिए भी आप मुद्रा योजना के तहत आवेदन दे सकते हैं।

PMMY के तहत नहीं होगी ब्याज दर में वृद्धि


लोन लेते समय संबंधित बैंक या वित्‍तीय संस्‍थान ने जो ब्‍याज दरें तय की होती हैं, पूरे कार्यकाल तक वह नहीं बदलती हैं। यदि ऐसा होता भी है तो स्‍वीकृत लोन पर उसका प्रभाव नहीं पड़ता।

प्रधान मंत्री आवास योजना

दोस्तों आज मै इस आर्टिकल के माध्यम से आपसे प्रधानमंत्री आवास योजना, नयी सूची से जुड़ी सभी जानकारी साझा करूंगा। जिसकी मदद से आप घर बैठे ही ऑनलाइन पीएम आवास योजना- ग्रामीण/शहरी सूची में अपना नाम देख सकते हो। दोस्तों, जैसे कि आपको पता होगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने वर्ष 2015 को पीएम आवास योजना का शुभारंभ किया था। इस योजना का उद्देश्य 31 मार्च 2022 तक भारत के प्रत्येक नागरिक को आवास प्रदान करना है। PM Awas Yojana के तहत वर्ष 2020 से 2022 तक 236 करोड़ मकान बनाये जाने है। प्रधानमंत्री आवास योजना को दो चरणों में विभाजित किया गया है। एक है पीएम ग्रामीण आवास योजना और दूसरा है पीएम शहरी आवास योजना।

इस योजना के तहत सरकार 2022 तक इछुक लाभार्थियों को  1 करोड़ पक्के घर  उपलब्ध कराएगी। इस योजना के तहत 2011 की जनगणना के आधार पर लाभार्थियों का चयन किया जायेगा।

Pradhan Mantri Gramin Awas Yojana 2020 के ज़रिये ग्रामीण क्षेत्रो के आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग  परिवारों को पक्का घर बनाने के लिए दी जाने वाली धनराशि सीधे बैंक अकॉउंट में पंहुचा दी जाएगी, और इस धनराशि से ग्रामीण क्षेत्र के लोग घर बनाने का सपना पूरा कर सकते है।

अपना घर हर किसी का सपना होता है। जिन लोगों के पास पर्याप्त रकम नहीं है, वे प्रधान मंत्री आवास योजना का लाभ लेकर अपने घर का सपना पूरा कर सकते हैं। इस योजना में सरकार होम लोन पर ढाई लाख रुपये तक की सब्सिडी देती है। सरकार लोगों को आर्थिक आधार पर सब्सिडी मुहैया कराती है। योजना के लिए आए आवेदनों में से सरकार योग्य उम्मीदवारों का चयन करती है और उन्हें योजना का लाभ दिया जाता है।

भारत सरकार ने साल 2022 तक 26 राज्यों के 2,508 शहरों को इस योजना के अंतर्गत लाने का लक्ष्य रखा है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सरकार अलग-अलग श्रेणियों में लोन प्रदान करती है। इनमें मध्यम आय वर्ग (MIG), कमजोर आय वर्ग (LIG) और आर्थिक पिछड़ा वर्ग (EWS) शामिल है।

अगर आपने अभी तक आवेदन नहीं किया है तो जल्द ही करिये, कई बार होता है कि हमारे पास घर बनाने के लिए पैसे नहीं होते हैं, इसके लिए भी सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत ऋण लेने की योजना को शुरू किया है, जिसके अंतर्गत आप होम लोन ले सकते हैं और प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत सब्सिडी का फायदा ले सकते हैं।

आवास योजना सूची में किन किन लोगों का नाम आएगा

दोस्तों आपको बता दूं कि
आवास योजना के सभी पात्र व्यक्ति, जो योजना की शर्तों के अनुसार योजना के लाभार्थी माने गए हों और जिनके द्वारा आवेदन प्रक्रिया सही से पूरी कर दी गई है, चाहे वो शहरी ग्रामीण आवास योजना के लाभार्थी हों या फिर ग्रामीण आवास योजना के, उन सब का नाम सूची में प्रदर्शित होगा।

PMAY सूची में अगर नाम न आये तो क्या करें

अगर आपको लगता है कि आप इस योजना के लाभार्थी हैं और फिर भी आपका नाम सम्मिलित नहीं है तो आपको जल्द से जल्द सम्बंधित अधिकारी से इस विषय में जानकारी लेनी होगी। हो सकता है कि आपसे आवेदन करते समय कोई त्रुटि हो गई हो।

ग्रामीण आवास योजना की budjet कितनी है


इस योजना के तहत 1 करोड़ मकानों के निर्माण के लिए कुल लागत 1, 30, 075 करोड़ है । इस लागत का वहन केंद्र सरकार और राज्य सरकार  के 60 :40  के आधार पर किया जायेगा । पूर्वोत्तर राज्यों और तीन हिमाचल राज्यों अर्थात जम्मू कश्मीर , हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के मामले में यह अनुपात 90 :10 है । ग्रामीण आवास योजना 2020 के अंतर्गत संध शासित क्षेत्रो के मामले में पूरी लागत का वहन केंद्र सरकार द्वारा किया जायेगा। इस योजना के तहत कुल लागत में केंद्रीय अंश 81 ,975 करोड़ रूपये होगा। जिसमे  से 60000  करोड़ रूपये की पूर्ति बजटीय सहायता से की जाएगी, और शेष 21 ,975 करोड़ रूपये की पूर्ति राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक से ऋण लेकर की जाएगी । जिसका परिशोधन 2022 के बाद बजटीय अनुदान से किया जायेगा ।

प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत कितनी अवधि के लिए लोन मिलता है


दोस्तों आपको बता दूं कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत अधिकतम 30 वर्षों की अवधि के लिए लोन प्रदान किया जाता है। यदि लाभार्थी की आयु 30 वर्ष की अवधि पूर्ण होने से पहले 65 वर्ष हो जाती है तो उसे अपनी आयु 65 वर्ष होने से  पहले लोन का भुगतान करना होगा। यदि कोई व्यक्ति इस अवधि से पहले भी लोन का भुगतान करना चाहे तो वह कर सकता है।

उमंग ऐप डाउनलोड करें

प्रधानमंत्री आवास योजना के बारे में CLSS सहित सभी तरह की जानकारी उमंग ऐप (UMANG) के माध्यम से प्राप्त की जा सकती है। उमंग ऐप का पूरा नाम यूनीफाइड मोबाइल एप्लिकेशन फॉर न्यू एज गवर्नेंस ऐप है। इस ऐप की सहायता से एक ही प्लैटफॉर्म पर कई सरकारी सेवाओं का लाभ लिया जा सकता है।

यहां आपको बता दूं कि CLSS सब्‍सिडी को कहा जाता है।

PMAY पीएम आवास योजना के लिए कितने डॉक्यूमेंट की जरूरत होगी

👉आधार कार्ड-  सभी उम्मीदवारों के लिए अपना आधार कार्ड विवरण प्रदान करना अनिवार्य है। आधार कार्ड के बिना कोई भी आवेदन नहीं कर सकता है।


👉एक पहचान और आवासीय प्रमाण-  दस्तावेजों में निम्नलिखित में से कोई भी शामिल हो सकता है-  वोटर आईडी, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस
जाति / सामुदायिक प्रमाण  पत्र- आवेदक को सहायक दस्तावेज या प्रमाणपत्र लाना होगा, यदि वह अल्पसंख्यक समुदाय से है
आवेदक द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर अनुभाग प्रमाण पत्र या निम्न आय समूह प्रमाण पत्र  प्रदान किया जाना चाहिए


👉राष्ट्रीयता का  प्रमाण- आवेदक अपना पासपोर्ट या कोई अन्य दस्तावेज दिखा सकते हैं
👉संपत्ति मूल्यांकन प्रमाण पत्र
बैंक विवरण और खाता विवरण-  सभी आवेदकों को अपना बैंक खाता विवरण प्रस्तुत करना आवश्यक है


👉वेतन पर्ची, आयकर रिटर्न (ITR) विवरण प्रमाण है कि लाभार्थी केवल PMAY योजना के तहत घर का निर्माण कर रहा है

प्रधानमंत्री आवास योजना की योग्यता क्या है

👉लाभार्थी या उसके परिवार के किसी सदस्य के पास भारत के किसी भी हिस्से में कोई आवास / पक्का घर नहीं होना चाहिए।
👉लाभार्थी ईडब्ल्यूएस श्रेणी से होना चाहिए अर्थात लाभार्थी की वार्षिक आय 3 लाख से कम होनी चाहिए।
👉लाभार्थी की वार्षिक आय 3 लाख से 6 लाख के बीच होनी चाहिए यदि वह LIG (लो इनकम ग्रुप) से है।

👉लाभार्थी की उम्र 70 वर्ष से अधिक नहीं होना चाहिए।
👉घर के स्वामित्व में परिवार की एक वयस्क महिला सदस्य की सदस्यता अनिवार्य है। इसका अर्थ है कि इस योजना के तहत प्रदान किए गए घर व्यक्तिगत रूप से एक वयस्क महिला सदस्य या पुरुषों के साथ संयुक्त रूप से स्वामित्व में होंगे।

दोस्तों अगर आपको यह लेख अच्छी लगी हो तो मुझे follow करिए क्यूंकि मै ऐसी ही जानकारी आपके लिए लाता रहूंगा।

यूपी बीसी सखी योजना

बीसी सखी योजना उत्तर प्रदेश

दोस्तों जैसा की आप लोगो ने सुना होगा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट सखी योजना की शुरुआत की है। इस योजना के द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार महिलाओं को रोजगार का एक बड़ा अवसर दे रही है। इस योजना के तहत ग्रामीण इलाकों में बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने के लिए शुरू में ऐसी 58,000 सखी की तैनाती की जाएगी। पैसों के लेनदेन के लिए इन्हें कमीशन मिलेगा। वर्तमान में इस योजना का पहला चरण है, जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार के सीएम योगी जी ने 35,938 स्वयं सहायता समूहों को 218.49 करोड़ रुपये का रिवॉल्विंग फंड भी प्रदान किया है।

👉इस योजना में सारा लेन-देन डिजिटल माध्यम से होगा। UP BC Sakhi Yojana 2020 में जो भी महिलाएं नियुक्त की जाएँगी उनका काम बैंकिंग सुविधाओं को लोगो के घर-घर तक पहुंचाना होगा। इस योजना के लिए यूपी सरकार द्वारा 430 करोड़ रूपये का बजट रखा गया है। इस योजना के लिए महिलाओं के पास आवेदन के लिए कुछ निर्धारित पात्रता होनी भी आवश्यक है, यदि महिलाए इन सब पात्रताओं को पूरा करती है तो सखी योजना का लाभ ले सकती है। इस योजना में आवेदन करने के लिए यूपी सरकार ने एक मोबाइल एप्प लांच किया है, आपको एप्प के माध्यम से ही आवेदन करना होगा।

दोस्तों आपको बता दु कि इस योजना का लाभ सिर्फ महिलाएं ले सकती है, पुरुष आवेदन के पात्र नहीं होंगे। सखी योजना के अंतर्गत ग्रामीण वर्ग की महिलाएं ही आवेदन के पात्र होंगी। और महिलाएं जिस ग्राम पंचायत के लिए आवेदन करेंगी उसी ग्राम पंचायत के निवासी होनी चाहिए।

यूपी बीसी सखी योजना का उद्देश्य

बीसी सखी

👉यूपी सरकार द्वारा चुनी गयी इन महिलाओं को 6 महीनो के लिए प्रतिमाह 4 हजार रूपये की राशि दी जाएगी। जिससे की महिला आसानी से अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति कर सकती है।

👉बीसी सखी योजना के अंतर्गत 58 हजार ग्रामीण महिलाओं को रोजगार मिलेगा।
👉डिजिटल डिवाइस खरीदने के लिए उम्मीदवार महिला को 50 हजार रूपये दिए जायेंगे।

👉इन महिलाओं की जिम्मेदारी अपने क्षेत्र के गावों में जाकर लोगो को जागरूक करना है। और घर बैठे लोगो के ग्रामीणों बैंक से जुड़े कार्य भी करने होंगे।


👉एक बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट को तैयार करने में लगभग चौहत्तर हजार रूपये का खर्चा आएगा। और 6 महीने की प्रोत्साहन राशि का प्रावधान इसलिए किया गया है ताकि महिलाये आर्थिक परेशानियों के कारण इस कार्य को न छोड़े।


👉बैंक नियुक्त महिलाओं को प्रत्येक लेन-देन पर भी कमीशन देगा। यानी की अब सखी योजना से जुडी महिलाओं को सैलरी से अतिरिक्त भी पैसे मिलेंगे।


👉इस योजना का फायदा महिलाओं को तो मिलेगा ही और साथ ही साथ बैंक में कम भीड़ होने से या ज्यादा काम का बोझ न पड़ने पर भी बैंक कर्मचारियों को सहूलियत प्रदान होगी।


👉ग्रामीण क्षेत्रो की महिलाओं को अपने घरों पर ही लोगो को बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध करवाने का विकल्प मिलेगा।

यूपी बीसी सखी योजना का लाभ

सरकारी योजना

👉 यूपी बीसी सखी योजना के अंतर्गत राज्य की महिलाओं को रोजगार के अवसर प्रदान किए जाएंगे। राज्य सरकार प्रवासी मजदूरों ( Migrant Workers ) को रोजगार उपलब्ध कराने के साथ ही साथ प्रदेश के बैंकिंग सिस्टम ( Banking System ) को सुधारने के लिए भी बड़ी पहल की है। सखी योजना के तहत बैंकिंग सुविधाओं को गांव-गांव तक पहुंचाया जाएगा।

👉 दोस्तों इस स्कीम का लाभ उत्तर प्रदेश के गांव में रहने वाली महिलाओं को मिलेगा। ये महिलाएं गांव में लोगों को बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराएंगी। इन पर गांव के लोगों को जागरूक करने की भी जिम्मेदारी होगी। इस स्कीम के लिए जारी किए गए फण्ड से एनजीओ में सिलाई कढ़ाई और पत्तल मसालों का निर्माण कर रही महिलाओं को लाभ मिलेगा।

👉 इस योजना के तहत भर्ती की गई सखियों का काम बैंकिंग सुविधाएं लोगो के घर तक पहुंचाना होगा। यह लेनदेन पूरी तरह से डिजिटल होगा।


👉 इस योजना के तहत राज्य में 58,000 महिलाओं को रोजगार प्रदान होगा। जिससे की महिलाएं सशक्त और आत्मनिर्भर बन सके। और लॉक डाउन में चलने वाली बेरोजगारी से भी निजात पा सकते है।

इस योजना के तहत कितनी मिलेगी सैलरी

दोस्तों आपको बता दूं कि उत्तर प्रदेश सरकार इन सखियों को 4 से 6 हज़ार रुपए सैलरी देगी। साथ ही इन सखियों को बैंकों द्वारा लेन-देन करने की स्थिति में कमीशन भी दिया जाएगा। इसके अलावा लोगों को बैंकिंग ट्रांजेक्‍शन कराने के लिए इन्‍हें कमीशन भी मिलेगा। यह कमीशन ट्रांजेक्‍शन से जुड़ा होगा। इसके अलावा सखियों को डिवाइस के लिए भी 50 हजार रुपये अलग से दिए जाएंगे। उत्तरप्रदेश सरकार के द्वारा सखी योजना के लिए 430 करोड रुपए का बजट रखा गया है।

यूपी बीसी सखी योजना को आवेदन करने की पात्रता

👉महिला उत्तर प्रदेश की मूल निवासी होनी चाहिए
👉महिला दसवीं पास होनी चाहिए।
👉महिला लेन-देन में निपूर्ण हो।
👉महिला बैंकिंग सेवाओं को समझने में सक्षम हो।

👉महिला को इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस चलाना आता हो।

यूपी बीसी सखी योजना का आवेदन कब तक किया जा सकता है

अगर आप भी इस योजना का लाभ उठाना चाहते है तो अभी ऑनलाइन आवेदन करे क्यूंकि बीसी सखी योजना के लिए 17 अगस्त तक ही आवेदन किया जा सकता है।

वन नेशन वन राशन कार्ड योजना

राशन कार्ड

👉 ये तो आप सभी लोग जानते है कि भारत सरकार के द्वारा हर शहर, गांव में सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान उपलब्ध है। जहां से राशन कार्ड धारक कम दामों पर राशन जैसे गेहूं, चावल, चीनी आदि ख़रीद सकते है। अब इसे और सरल और आसान बनाने के लिए भारत सरकार खाद्य एंव रसद मंत्रालय ने एक और योजना की शुरुआत की है। जिसका नाम है “एक देश एक राशन कार्ड योजना”। शायद आपने Ek Desh Ek Ration Card Yojana के बारे में पहले न्यूज़ अख़बार में पढ़ा हो।

👉 दोस्तों हाल ही में केंद्र सरकार ने अपने महत्वपूर्ण विभागों के विभिन्न प्रकार के मंत्रियों के साथ एक विशेष बैठक की थी। केंद्र सरकार की इस विशेष बैठक में देश के हित के लिए कई बड़े बड़े फैसलों पर निर्णय लिया गया है। उन्हीं सभी महत्वपूर्ण निर्णय में से एक देश एक राशन कार्ड योजना का भी एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। इस योजना का लाभ भारतवर्ष के प्रत्येक राज्य को प्रदान किया जाएगा। कोई भी राशन कार्ड धारक व्यक्ति कहीं पर भी रहे इस योजना के अंतर्गत वह अपने अनाज को पीडीएस की दुकान पर जाकर बड़ी ही आसानी से प्राप्त कर सकता है। आज के इस कठिन समय में प्रत्येक राशन कार्ड धारकों के लिए यह निर्णय एक बड़ी राहत जैसा ही है।

👉 दोस्तों आपको बता दूं कि भारत सरकार ने नई टेक्नोलॉजी और डिजिटल इंडिया को ध्यान में रखते हुए खाद्यान्न चोरी को रोकने के लिए और अपने राज्य से दूर अन्य राज्य में कर रहे रोज़गार, व्यक्ति की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एक देश एक राशन कार्ड की योजना को शुरू किया है। Ek Desh Ek Ration Card Yojana का लाभ उन लोगो को सबसे ज्यादा मिलेगा जो अपने किसी रोज़गार, काम की वजह से बाहर अन्य किसी राज्य में रहते है।

किन राज्यों में हुआ है लागू

भारत देश

👉 दोस्तों इस योजना को लागू करने के लिए सभी पीडीएस दुकानों पर पीओएस मशीनें लगवाई गई हैं जिसके बाद उन्हें इस योजना में शामिल कर लिया जाएगा। आपको बता दें कि फिलहाल 20 राज्यों में इस योजना को लागू किया गया है। आंध्र प्रदेश ,गुजरात ,कर्नाटक ,राजस्थान, हरियाणा ,झारखण्ड ,केरल ,त्रिपुरा तेलंगाना ,महाराष्ट्र, बिहार, यूपी, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, दमन और दीव समेत 20 राज्यों के लाभार्थियों को इसका लाभ मिलेगा, तथा दिल्ली, तमिलनाडु, असम, पश्चिम बंगाल, जम्मू कश्मीर, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, लक्षद्वीप, अंडमान निकोबार, छत्तीसगढ़, चंडीगढ़, पुडुचेरी और लद्दाख में इस योजान की शुरुआत नहीं की गई है।

वन नेशन वन राशन कार्ड का उद्देश्य

Online rashion card

👉आपको पता होगा कि वर्तमान में कोरोना महामारी के कारण करोड़ों की संख्या में गरीब मजदूर व श्रमिक शहरों से गांवों की तरफ लौट आए हैं। जिसके कारण अब उनके सामने रोजगार की समस्या तो खड़ी हो ही गई है उनके सामने खाने तक की समस्या आ गई है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने इसे लागू करने का फैसला किया। यह योजना मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी की तरह है जिसके मुताबिक आप एक राज्य से दूसरे राज्य जाने पर भी एक ही राशन कार्ड का इस्तेमाल कर सकते हैं दूसरे राज्य जाने पर ना ही राशन कार्ड का नंबर बदलेगा और ही राशन कार्ड।

👉 इस पीडीएस योजना के लाभार्थियों की पहचान उनके आधार आधारित पहचान के आधार पर इलेक्ट्रॉनिक पॉइंट ऑफ़ सेल (PoS) डिवाइस के माध्यम से की जाएगी। सभी पीडीएस दुकानों में इलेक्ट्रॉनिक पॉइंट ऑफ सेल (PoS) डिवाइस की सुविधा होगी। राज्य जिसमें पीडीएस दुकानों पर 100% PoS मशीनें हैं, उन्हें ‘वन नेशन, वन राशन कार्ड’ योजना में शामिल किया जाएगा।


👉 देश भर में पीडीएस की लगभग 77% दुकानों में PoS मशीनें हैं और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के अंतर्गत आने वाले लगभग 85% लोगों के पास आधार कार्ड से जुड़े कार्ड हैं।

👉 वन नेशन वन राशन कार्ड में लैंग्वेज
वर्तमान में, राशन कार्ड में भारतीय राज्यों के अलग-अलग प्रारूप और भाषाएं हैं। लेकिन अब सभी राज्य एक मानक प्रारूप का पालन करेंगे। राज्य सरकारों से राशन कार्ड को द्वि-भाषी प्रारूप में जारी करने का अनुरोध किया गया है, जिसमें स्थानीय भाषा के अलावा, अन्य भाषा अंग्रेजी या हिंदी हो सकती है।


👉 भारत का कोई भी कानूनी नागरिक इस राशन कार्ड के लिए आवेदन कर सकता है। 18 साल से कम उम्र के बच्चों को उनके माता-पिता के राशन कार्ड में जोड़ा जाएगा।

👉 अगर लाभार्थी अपने काम के कारण किसी अन्य राज्य में रहते है तो वह अपने हिस्से का राशन उसी राज्य की किसी भी सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान से ले सकते है।
इससे पैसे और समय दोनों की बचत होगी।
आपको अपना पूरा राशन मिल सकेगा।
परिवार का कोई भी सदस्य जिसका नाम राशन कार्ड मे है और उसका आधार भी राशन ने जुड़ा है। वह भी राशन ले सकता है।

👉 इस योजना के तहत, प्रत्येक बीपीएल परिवार को 35 किलोग्राम मिलता है। पश्चिमी जिलों में खाद्यान्न – (20 किलोग्राम चावल और 15 किलोग्राम गेहूं), पूर्वी जिलों में – (25 किलोग्राम चावल और 10 किलोग्राम गेहूं) प्रत्येक महीने एक निश्चित मूल्य पर। गेहूँ का मूल्य रु। 3 प्रति किग्रा। और चावल रु। 2 प्रति कि.ग्रा।

वन नेशन वन राशन कार्ड का लाभ

👉 दोस्तों इस योजना के शुरू हो जाने के बाद अनाज वितरण के क्षेत्र में भ्रष्टाचार पर भी पारदर्शिता लागू हो जाएगी और कोई भी राशन कार्ड धारक एक ही पीडीएस दुकान से राशन प्राप्त करने के लिए बाधित नहीं रहेगा। ऐसा होने के बाद अब सभी पीडीएस दुकानदार धांधली नहीं करेंगे और सभी लोगों को एक निर्धारित मात्रा में अनाज को प्राप्त करने में आसानी होगी।

👉 भारत सरकार इस योजना को जितना हो सके उतना जल्दी संपूर्ण भारतवर्ष के राज्य में शुरू करने का प्रयास कर रही है। इससे इस कठिन समय में भी लोगों को आसानी से समय रहते आवश्यक लाभ योजना द्वारा प्राप्त हो सके। केंद्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग इस योजना में तेजी लाने के लिए अपने स्तर तक बहुत ही अधिक कार्य कर रहे हैं। ताकि सभी आवश्यक राज्यों में इसका लाभ जल्द से जल्द जरूरतमंदों को प्रदान किया जा सके।

👉 इस योजना के शुरू हो जाने पर सभी प्रकार के सरकारी पीडीएस दुकान के विक्रेताओं पर भी ज्यादा कार्यभार नहीं रहेगा। इसके अतिरिक्त भारत सरकार ने सभी प्रकार के पीडीएस दुकानों का एकीकृत करने का निर्णय लिया है

👉 एक देश एक राशन कार्ड की पहल शुरू हो जाने के बाद से उन सभी गरीब प्रवासी मजदूरों को राहत मिलेगा जो दूसरे राज्य में जाकर अपने लिए किसी भी प्रकार का कार्य ढूंढ कर करते हैं। ऐसे में इस सेवा का लाभ उठाकर वे कहीं पर भी हर महीने मिलने वाले सरकार की तरफ से अनाज को पीडीएस दुकान से प्राप्त कर सकते हैं। इस योजना के शुरू हो जाने के बाद सभी प्रकार के राशन कार्ड धारक किसी भी जगह से सरकार द्वारा मिलने वाले राशन को प्राप्त करने के लिए संपूर्ण रूप से स्वतंत्र हो जाएंगे।

👉 यह योजना उन गरीब श्रमिकों को पर्याप्त खाद्यान्न की उपलब्धता सुनिश्चित करेगी जो अपने गृह जिले से पलायन करते हैं।

👉 यह पीडीएस की दुकानों पर कालाबाजारी के चलन को कम करेगा। वर्तमान में, पीडीएस दुकान के मालिक वास्तविक लाभार्थियों की अनुपस्थिति में इन खाद्यान्नों को बाजार में बेचते हैं।


👉 इससे देश में भूख से होने वाली मौत की घटनाओं में कमी आएगी जो ग्लोबल हंगर इंडेक्स रैंकिंग में भारतीय रैंक को और बेहतर बनाएगी।

राशन कार्ड कैसे बनवाए

👉 राशन कार्ड ऑनलाइन करने के लिए जरूरी दस्तावेज़
पैनकार्ड
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हिरोशिमा और नागासाकी परमाणु बमबारी

परमाणु बम

दोस्तों आइए, उस परमाणु नर-संहार पर दृष्टि डालते हैं, जिसे सुनकर आज भी दुनिया दहल जाती है। वर्ष 1945 में इसी अगस्त माह की छह तारीख को एनोला गे नामक एक अमेरिकी बी-29 बमवर्षक ने ‘लिटिल ब्वॉय’ नामक परमाणु बम हिरोशिमा पर बरसाया था। अमेरिकी बॉम्बर प्लेन बी-29 ने जमीन से तकरीबन 31000 फीट की ऊंचाई से परमाणु बम गिराया था। जिस जगह पर बम गिराया गया था, उसके आसपास की हर चीज जलकर खाक हो गई थी। जमीन लगभग 4,000 डिग्री सेल्सियस गर्म हो उठी थी। उस परमाणु हमले में लगभग 1.4 लाख लोग मारे गए थे। जो लोग बम हमले से बच गए थे, रेडिएशन की चपेट में आने के कारण बाद में मर गए थे। इसी तरह जापान के पत्तन शहर नागासाकी पर भी 9 अगस्त को परमाणु बम से हमला बोला गया था। इसमें 70 हजार लोग मारे गए थे।

जानकारों के मुताबिक अमेरिका हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराकर किसी शहर के ऊपर इस बम का टेस्ट करना चाहता था। उसने जापान की राजधानी टोक्यो पर हमला इसलिए नहीं किया क्योंकि वहां पर पहले ही काफी बमबारी हो चुकी थी। ऐसे में परमाणु बम से होने वाली तबाही और पहले से हुई तबाही में अंतर कर पाना मुश्किल होता। एक और जापानी शहर क्योटो पर भी परमाणु बम गिराने की योजना इसलिए टाली गई क्योंकि वहां एक टॉप अमेरिका अधिकारी, सेक्रेटरी ऑफ वॉर हेनरी स्टिमसन ने अपना हनीमून मनाया था और वे नहीं चाहते थे कि शहर की सांस्कृतिक धरोहरों को नुकसान पहुंचाया जाए। इसलिए हिरोशिमा और नागासाकी को चुना गया।

1945 की गर्मियों के अंतिम महीने में पॉट्सडैम शांति सम्मेलन के दौरान अमरीकी राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन ने इस बात का ऐलान किया कि अमरीका के पास एक नया सुपर हथियार है। कहा जा रहा था कि ट्रूमन इस जुमले को कहकर सोवियत नेता जोसेफ़ स्टालिन की आँखों में डर और ख़ौफ़ को देखना चाहते थे। लेकिन स्टालिन ने ऐसा प्रभाव दिया जैसे कि कुछ भी नहीं हुआ है। और इसके कुछ ही दिनों के बाद हिरोशिमा और नागासाकी की त्रासदी ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया।

यूरेनियम वाला बम हिरोशिमा पर गिराया गया और प्लूटोनियम वाला नागासाकी पर। यह दूसरा बम बहुत ख़र्चीला था और तब तक बिना परीक्षण का था। यानी उसका गिराया जाना सीधे लड़ाई के मैदान में परीक्षण जैसा था।
कहा जाता है कि परमाणु बम का निर्माण 1941 में तब शुरू हुआ जब नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने अमेरिकी राष्ट्रपति फ्रैंकलीन रूजवेल्ट को इस प्रोजेक्ट को फंडिंग करने के लिए राजी किया। उस समय खुद आइंस्‍टीन ने भी नहीं सोचा होगा कि उसके इतने घातक परिणाम होंगे।

6 अगस्त को हिरोशिमा पर हुआ था परमाणु हमला

त्रासदी

दोस्तों, परमाणु बम गिराने के लिए हिरोशिमा को इसलिए निशाना बनाया गया था क्योंकि अमरीकी वायुसेना के हमलों में इसे टारगेट नहीं किया गया था। ऐसे में परमाणु बम की विध्वंस क्षमता का पता लगाना आसान होता। यह जापान का अहम सैन्य ठिकाना भी था। इसके अलावा ज़्यादा आबादी वाले द्वीपों को निशाना बनाने से परहेज किया गया था।
विस्फोट के बाद हिरोशिमा में जगह-जगह आग लग गई थी. ये आग तीन दिनों तक जारी रही। विस्फोट होते ही 60 हज़ार से 80 हज़ार लोगों की मौत तुरंत हो गई। बम धमाके के बाद इतनी गर्मी थी कि लोग सीधे जल गए। इसके बाद हज़ारों लोग परमाणु विकिरण संबंधी बीमारियों के चलते मारे गए। इस विस्फोट में कुल 1,35,000 लोगों की मौत हुई थी।

बम हिरोशिमा के तय जगह पर नहीं गिराया जा सका था, यह हिरोशिमा के आइयो ब्रिज के पास गिरने वाला था मगर उल्टी दिशा में बह रहे हवा के कारण यह अपने लक्ष्य से हटकर शीमा सर्जीकल क्लिनीक पर गिरा। कनेर (ओलियंडर) नाम का फूल इस हमले के बाद सबसे पहले खिला था, यह हिरोशिमा का ऑफिशियल फूल है।

9 अगस्त को नागासाकी पर हुआ था परमाणु हमला

दोस्तों अमेरिका द्वारा फिर एक बार दूसरा परमाणु हमला 9 अगस्त 1945 को किया गया था। इस समय निशाना था जापान का कोकुरा शहर, लेकिन कुछ कारण की वजह से इस बम का शिकार नागासाकी बना। यह बमवर्षक बी-29 सुपरफोर्ट्रेस बॉक्स पर लदा हुआ था। यह बम किसी भीमकाय तरबूज-सा था और वज़न था 4050 किलो। बम का नाम विंस्टन चर्चिल के सन्दर्भ में ‘फैट मैन’ रखा गया।

नागासाकी शहर के पहाड़ों से घिरे होने के कारण केवल 6.7 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में ही तबाही फैल पाई। लगभग 74 हजार लोग इस हमले में मारे गए थे और इतनी ही संख्या में लोग घायल हुए थे। इसी रात अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन ने घोषणा की-जापानियों को अब पता चल चुका होगा कि परमाणु बम क्या कर सकता है।’ उन्होंने कहा-अगर जापान ने अभी भी आत्मसमर्पण नहीं किया तो उसके अन्य युद्ध प्रतिष्ठानों पर हमला किया जाएगा और दुर्भाग्य से इसमें हजारों नागरिक मारे जाएंगे।

15 अगस्त को जापान ने किया आत्मसमर्पण

यह परमाणु हमला जापान को दूसरे विश्व युद्ध में आत्मसमर्पण कराने के लिए किया गया था। जापान दूसरे विश्व युद्ध में धुरी राष्ट्र के साथ था और अमेरिका मित्र राष्ट्रों के साथ। यह दुनिया का पहला और अंतिम परमाणु हमला हैं। इस समय अमेरिका के राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन (Harry S. Truman) थे। इस हमले के बाद जापान ने आत्मसमर्पण कर दिया था।परमाणु बम के इस्तेमाल से अमेरिका ने न सिर्फ अपने उन्नत तकनीकी कौशल का प्रदर्शन किया, बल्कि वैश्विक राजनीति में अपनी निर्णायक भूमिका की शुरुआत भी की।

बम वर्षा के कुछ दिन बाद 15 अगस्त 1945 को जापान ने आत्मसमर्पण कर दिया था और युद्ध समाप्त हो गया था।

कहा जाता हैं अगर जापान 15 अगस्‍त को सरेंडर नहीं करता तो अमेरिका ने 19 अगस्‍त को एक और शहर पर परमाणु बम गिराने की योजना बनाई थी।

आज के परमाणु संपन्न देश

विश्व का नक्शा

दोस्तों आज के परमाणु संपन्न देशो के पास सन 1945 के दुसरे विश्व युद्ध की तुलना में कई गुणा अधिक मारक क्षमता की युद्ध सामग्री एकत्रित हो चुकी है। हिरोशिमा और नागासाकी पर गिराए गए बमों की तुलना में , उनसे एक लाख गुणा अधिक शक्तिशाली बम बना लिए गए हैं। अमेरिका, चीन जैसा कोई तामसिक, अहंकारी, स्वार्थी और साम्राज्यवादी देश कब क्या कर बैठे, कहना कठिन है। परमाणु बमों जैसे घातक बमों का जखीरा इन परमाणु सम्पन्न देशों के पास इतनी अधिक मात्र में है कि उनसे दुनिया को कई बार तबाह किया जा सकता है। अनुमान है कि अमेरिका ने 10640 , रूस 10000 , फ्रांस 464 , चीन 420 , इस्राईल 200 , यु.के. 200 , भारत 95 तथा पाकिस्तान ने 50 घातक परमाणु बम या इनसे भी शक्तिशाली बमों का निर्माण कर लिया है।

अयोध्या धाम

प्रभु राम जी

अयोध्या नगरी, जहाँ भगवान् राम का जन्म हुआ, जहाँ महाकाव्य रामायण की शुरुवात हुई और जहाँ रामायण का समापन भी हुआ। अयोध्या नगरी, जिसके बारे में भारत वर्ष में पैदा हुआ बच्चा बच्चा जानता है, भले ही उसे उस नगरी के यथार्थ भौगोलिक स्थिति का ज्ञान तक ना हो, तो आइए जानते हैं अयोध्या धाम के बारे में शुरूवात से,राम जी के काल में भारत 16 महा जनपदों में बंटा था,तथा महाभारत काल में 18 महाजनपदों में बंटा था। इन महाजनपदों के अंतर्गत कई जनपद होते थे। उन्हीं में से एक था कौशल महाजनपद इसकी राजधानी थी अवध, जिसके साकेत और श्रावस्ती दो हिस्से बाद में हुए, तथा अवध को ही अयोध्या कहा गया, दोनों का अर्थ एक ही होता है। रामायण और रामचरित मानस के अनुसार राजा दशरथ के राज्य कौशल की राजधानी अयोध्या थी।

अयोध्या सप्तपुरियों में से एक है जिसके पास नंदिग्राम है। अयोध्या के पास सरयू नदी बहती है। स्‍कंदपुराण के अनुसार अयोध्‍या भगवान विष्‍णु के चक्र पर विराजमान है। विष्णु का चक्र स्थान सरयू के पास ही स्थित है। अयोध्या की स्थापना राजा वैवस्वत मनु ने की थी जिनके कुल भी भगवान ऋषभनाथ और भरत हुए थे। उन्हीं के कुल भी इक्ष्वाकु हुए जिन्होंने अयोध्या पर राज किया। राजा हरिशचंद्र के बाद के कुल में राजा रघु हुए और फिर दशरथ हुए। वाल्मीकि कृत रामायण और पुराणों के अनुसार दशरथ की अयोध्या में ही प्रभु श्रीराम का जन्म हुआ था और उन्होंने सरयू में ही जल समाली ले ली थी। अयोध्या को छोड़कर दुनिया में ऐसी कोई नगरी नहीं है जिसके पास सरयू नदी है, जो रघुओं की राजधानी है और जो विष्णु के चक्र पर विराजमान है। हजारों प्रमाण है कि इसी अयोध्‍या में श्रीराम का जन्म हुआ था।

अयोध्या नगरी बसा है सरयू नदी के तट पर

सरयू नदी

वाल्‍मीकि रामायण के 5वें सर्ग में अयोध्‍या पुरी का वर्णन विस्‍तार से किया गया है। जिसमें बताया गया है कि सरयू नदी के तट पर बसे इस नगर की रामायण अनुसार विवस्वान (सूर्य) के पुत्र वैवस्वत मनु महाराज द्वारा स्थापना की गई थी। सभी शास्त्रों में इसका उल्लेख मिलेगा कि अयोध्या नगरी सरयु नदी के तट पर बसी थीं जिसके बाद नंदीग्राम नामक एक गांव था। अयोध्या से 16 मील दूर नंदिग्राम हैं जहां रहकर भरत ने राज किया था। यहां पर भरतकुंड सरोवर और भरतजी का मंदिर है। अन्य किसी भी दावे वाले स्थान पर न तो नंदिग्राम है और न ही सरयू नदी और ना ही हनुमानगढ़ी।

पौराणिक कथाओं के अनुसार ब्रह्मा से जब मनु ने अपने लिए एक नगर के निर्माण की बात कही तो वे उन्हें विष्णुजी के पास ले गए। विष्णुजी ने उन्हें साकेतधाम में एक उपयुक्त स्थान बताया। विष्णुजी ने इस नगरी को बसाने के लिए ब्रह्मा तथा मनु के साथ देवशिल्‍पी विश्‍वकर्मा को भेज दिया। इसके अलावा अपने रामावतार के लिए उपयुक्‍त स्‍थान ढूंढने के लिए महर्षि वशिष्‍ठ को भी उनके साथ भेजा। मान्‍यता है कि वशिष्‍ठ द्वारा सरयू नदी के तट पर लीलाभूमि का चयन किया गया, जहां विश्‍वकर्मा ने नगर का निर्माण किया।

रघुवंशों की राजधानी थी अयोध्या धाम

अयोध्या धाम


  अयोध्या रघुवंशी राजाओं की कौशल जनपद की बहुत पुरानी राजधानी थी। वैवस्वत मनु के पुत्र इक्ष्वाकु के वंशजों ने इस नगर पर राज किया था। इस वंश में आगे चलकर राजा हरिशचंद्र, भगिरथ, सगर आदि के बाद राजा दशरथ 63वें शासक थे। इसी वंश के राजा भारत के बाद श्रीराम ने शासन किया था। उनके बाद कुश ने इस नगर का पुनर्निर्माण कराया था। कुश के बाद बाद सूर्यवंश की अगली 44 पीढ़ियों तक इस पर रघुवंश का ही शासन रहा। फिर महाभारत काल में इसी वंश का बृहद्रथ, अभिमन्यु के हाथों महाभारत के युद्ध में मारा गया था। बृहद्रथ के कई काल बाद तक यह नगर मगध के मौर्यों से लेकर गुप्तों और कन्नौज के शासकों के अधीन रहा। अंत में यहां महमूद गजनी के भांजे सैयद सालार ने तुर्क शासन की स्थापना की और उसके बाद से ही अयोध्या के लिए लड़ाइयां शुरु हो गई। उसके बाद तैमूर, तैमूर के महमूद शाह और फिर बाबर ने इस नगर को लूटकर इसे ध्वस्त कर दिया था।

अयोध्या को अवध क्यों कहते हैं

 स्कंदपुराण के अनुसार अयोध्या शब्द ‘अ’ कार ब्रह्मा, ‘य’ कार विष्णु है तथा ‘ध’ कार रुद्र का स्वरूप है। इसका शाब्दिक अर्थ है जहां पर युद्ध न हो। यह अवध का हिस्सा है। अवध अर्थात जहां किसी का वध न होता हो। अयोध्या का अर्थ -जिसे कोई युद्ध से जीत न सके। राम के समय यह नगर अवध नाम की राजधानी से जाना जाता था। बौद्ध ग्रन्थों में इन नगरों के पहले अयोध्या और बाद में साकेत कहा जाने लगा। कालिदास ने उत्तरकोसल की राजधानी साकेत और अयोध्या दोनों ही का नामोल्लेख किया है।

 

सबसे पहले किसने बनवाया था राम मंदिर

महाभारत के युद्ध के बाद अयोध्या उजड़-सी हो गई, मगर श्रीराम जन्मभूमि का अस्तित्व फिर भी बना रहा। पौराणिख उल्लेख के अनुसार यहां जन्मभूमि पर सबसे पहले राम के पुत्र कुश ने एक मंदिर बनवाया था।

विक्रमादित्य ने पुन: निर्माण कराया

इसके बाद यह उल्लेख मिलता है कि ईसा के लगभग 100 वर्ष पूर्व उज्जैन के चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य ने इसे राम जन्मभूमि जानकर यहां एक भव्य मंदिर के साथ ही कूप, सरोवर, महल आदि बनवाए थे। कहते हैं कि उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि पर काले रंग के कसौटी पत्थर वाले 84 स्तंभों पर विशाल मंदिर का निर्माण करवाया था। इस मंदिर की भव्यता देखते ही बनती थी।

पुष्यपित्र शुंग ने कराया पुनः निर्माण

.विक्रमादित्य के बाद के राजाओं ने समय-समय पर इस मंदिर की देख-रेख की। उन्हीं में से एक शुंग वंश के प्रथम शासक पुष्यमित्र शुंग ने भी मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया था। अनेक अभिलेखों से ज्ञात होता है कि गुप्तवंशीय चन्द्रगुप्त द्वितीय के समय और तत्पश्चात काफी समय तक अयोध्या गुप्त साम्राज्य की राजधानी थी। गुप्तकालीन महाकवि कालिदास ने अयोध्या का रघुवंश में कई बार उल्लेख किया है। यहां पर 7वीं शताब्दी में चीनी यात्री हेनत्सांग आया था। उसके अनुसार यहां 20 बौद्ध मंदिर थे तथा 3,000 भिक्षु रहते थे और यहां हिन्दुओं का एक प्रमुख और भव्य मंदिर भी था, जहां रोज हजारों की संख्या में लोग दर्शन करने आते थे।

किसने तोड़ा था अयोध्या में राम मंदिर


विभिन्न आक्रमणों के बाद भी सभी झंझावातों को झेलते हुए श्रीराम की जन्मभूमि पर बना भव्य मंदिर 14वीं शताब्दी तक बचा रहा। कहते हैं कि सिकंदर लोदी के शासनकाल के दौरान यहां भव्य मंदिर मौजूद था। 14वीं शताब्दी में हिन्दुस्तान पर मुगलों का अधिकार हो गया और उसके बाद ही राम जन्मभूमि एवं अयोध्या को नष्ट करने के लिए कई अभियान चलाए गए। अंतत: 1527-28 में इस भव्य मंदिर को तोड़ दिया गया और उसकी जगह बाबरी ढांचा खड़ा किया गया। कहते हैं कि मुगल साम्राज्य के संस्थापक बाबर के सेनापति मीर बकी ने बिहार अभियान के समय अयोध्या में श्रीराम के जन्मस्थान पर स्थित प्राचीन और भव्य मंदिर को तोड़कर एक मस्जिद बनवाई थी, जो 1992 तक विद्यमान रही।

सप्तपुरियों में से एक है अयोध्या धाम

 प्राचीन उल्लेखों के अनुसार प्रभु श्रीराम का जन्म सप्तपुरियों में से एक अयोध्या में हुआ था। वर्तमान में सरयू तट पर स्थिति जो अयोध्या है वही सप्तपुरियों में से एक है। यदि अयोध्या कहीं और होती तो उसका सप्तपुरियों के वर्णन में कहीं ओर बसे होने का उल्लेख होता और वर्तमान की अयोध्या एक तीर्थ स्थल नहीं बनता जो कि महाभारत काल से ही विद्यमान है। भारत की प्राचीन नगरियों में से एक अयोध्या को हिन्दू पौराणिक इतिहास में पवित्र सप्त पुरियों में अयोध्या, मथुरा, माया (हरिद्वार), काशी, कांची, अवंतिका (उज्जयिनी) और द्वारका में शामिल किया गया है।

मिथिला के राजा जनक

 रामायण काल में मिथिला के राजा जनक थे। उनकी राजधानी का नाम जनकपुर है। जनकपुर नेपाल का प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। यह नेपाल की राजधानी काठमांडू से 400 किलोमीटर दक्षिण पूरब में बसा है। यह शहर भगवान राम की ससुराल के रूप में विख्यात है। इस नगर में ही माता सीता ने अपना बचपन बिताया था। कहते हैं कि यहीं पर उनका विवाह भी हुआ। कहते हैं कि भगवान राम ने इसी जगह पर शिव धनुष तोड़ा था। यहां मौजूद एक पत्थर के टुकड़े को उसी धनुष का अवशेष कहा जाता है। यहां धनुषा नाम से विवाह मंडप स्‍थित है इसी में विवाह पंचमी के दिन पूरी रीति-रिवाज से राम-जानकी का विवाह किया जाता है। यहां से 14 किलोमीटर ‘उत्तर धनुषा’ नाम का स्थान है। राजा जनक विदेही और श्रमणधर्मी थे। विश्वामित्र का आश्रम वाराणसी के आसपास ही कहीं था। वहीं से श्रीराम जनकपुर गए थे। अयोध्या से जनकपुर लगभग 522 किलोमीटर है।

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